आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "bint-e-inab"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "bint-e-inab"
ग़ज़ल
सुब्ह तक रक़्स-कुनाँ बिन्त-ए-इनब देखेंगे
आज वो तुर्फ़ा-तमाशा है कि सब देखेंगे
सय्यद आबिद अली आबिद
ग़ज़ल
कुछ बिन्त-ए-'इनब पर तिरा क़ब्ज़ा नहीं वा'इज़
ठेके में नहीं है तिरे मय-ख़ाना किसी का
नवाब उमराव बहादूर दिलेर
ग़ज़ल
सदा याँ हिल्लत-ए-बिंत-ए-इनब की अक़्द जारी है
तरीक़ा है निराला पीर-ए-मय-कश की तरीक़त का
असद अली ख़ान क़लक़
ग़ज़ल
निकली न ख़ुम से बज़्म-ए-जवानान-ए-मस्त में
पीर-ए-मुग़ाँ का बिन्त-ए-इनब ने किया लिहाज़
असद अली ख़ान क़लक़
ग़ज़ल
शीशा से बन के परी बिन्त-ए-इनब जब निकली
देख कर जामे से बाहर वहीं मय-ख़्वार हुए
मुंशी ठाकुर प्रसाद तालिब
ग़ज़ल
रिदा-ए-बिन्त-ए-इनब बन गई बिसात-ए-नुजूम
ये एहतिमाम है 'राजे' किस आदमी के लिए
माया खन्ना राजे बरेलवी
ग़ज़ल
ज़ाहिद ने भी अक़्द आज किया बिन्त-ए-इनब से
जुफ़्त-ए-बत-ए-मय मुर्ग़-ए-मुसल्ला नज़र आया