आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "burd"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "burd"
ग़ज़ल
अमीर ख़ुसरो
ग़ज़ल
अपनी बातों के ज़माने तो हवा-बुर्द हुए
अब किया करते हैं हम सूरत-ए-हालात पे बात
बासिर सुल्तान काज़मी
ग़ज़ल
वही जोश-ए-हक़-शनासी वही अज़्म-ए-बुर्द-बारी
न बदल सका ज़माना मिरी ख़ू-ए-वज़ा-दारी
जुर्म मुहम्मदाबादी
ग़ज़ल
क्या कहिए तेरे हाथों से ऐ दस्त-बुर्द-ए-इश्क़
इस दिल की बस्ती बात के कहते उजड़ गई
जोशिश अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
बुलबुल का आशियाँ न बचा दस्त-बुर्द से
किस रोज़ बे-ज़बानों पे जौर-ए-ख़िज़ाँ न था
महाराजा सर किशन परसाद शाद
ग़ज़ल
मुझ से दरिया ने कहा देख के बार-ए-हिजरत
बुर्द याँ पर कोई नेकी नहीं की जा सकती