आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "chaak-e-garebaan"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "chaak-e-garebaan"
ग़ज़ल
गुलशन के गुल हैं चाक-ए-गरेबाँ तिरे बग़ैर
उजड़ी हुई है बज़्म-ए-गुलिस्ताँ तिरे बग़ैर
असलम बाराबंकवी
ग़ज़ल
कैसे रफ़ू हों चाक-ए-गरेबाँ मैं भी सोचूँ तू भी सोच
अपने अपने दर्द का दरमाँ मैं भी सोचूँ तू भी सोच
असरारुल हक़ असरार
ग़ज़ल
क़द्र दीवानों की सहरा-ए-जुनूँ गर करता
ख़ार तक बख़िया-गर-ए-चाक-ए-गरेबाँ होता
मुंशी ठाकुर प्रसाद तालिब
ग़ज़ल
ग़ैरों के जामे पर रही अहबाब की नज़र
अपना रफ़ो-ए-चाक-ए-गरेबाँ न कर सके
अब्दुल क़य्यूम ज़की औरंगाबादी
ग़ज़ल
कहाँ तक होगा आलमगीर ये वहशत का हंगामा
ये कैसी वुसअ'तें हैं कूचा-ए-चाक-ए-गरेबाँ में
बासित भोपाली
ग़ज़ल
दस्त-ए-वहशत में ये अपना ही गरेबाँ कब तक
ख़त्म अब सिलसिला-ए-चाक-ए-गरेबाँ कर दें
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
उफ़ुक़ पर फैलती हैं सुर्ख़ियाँ जब सुब्ह-ए-ताज़ा की
कोई सीना पस-ए-चाक-ए-गरेबाँ याद आता है
रईस अमरोहवी
ग़ज़ल
जाने क्या बात है सब अहल-ए-जुनूँ हैं ख़ामोश
आज वो सिलसिला-ए-चाक-ए-गरेबाँ भी नहीं