aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chalte"
ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैंशुक्रिया मश्वरत का चलते हैं
राह चलते हुए अक्सर ये गुमाँ होता हैवो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे
आप कहिए तो निभाते चले जाएँगे मगरइस तअ'ल्लुक़ में अज़िय्यत के सिवा कुछ भी नहीं
उस के पहलू से लग के चलते हैंहम कहीं टालने से टलते हैं
चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीबसोचते रहते हैं किस राहगुज़र के हम हैं
खुल गए शहर-ए-ग़म के दरवाज़ेइक ज़रा सी हवा के चलते ही
लाखों ही मुसाफ़िर चलते हैं मंज़िल पे पहुँचते हैं दो एकऐ अहल-ए-ज़माना क़द्र करो नायाब न हों कम-याब हैं हम
मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहेमुक़द्दर में चलना था चलते रहे
हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलतेअब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते
घर की गिरती हुई दीवारें ही मुझ से अच्छीरास्ता चलते हुए लोग ठहर जाते हैं
यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलतेवहीं थम के रह गई है मिरी रात ढलते ढलते
हम से टकरा गई ख़ुद बढ़ के अँधेरे की चटानहम सँभल कर जो बहुत चलते थे नाचार गिरे
जहाँ मौज-ए-हवादिस चाहे ले जाएख़ुदा हूँ मैं न कोई नाख़ुदा हूँ
चलते हुए बादल के साए के तआक़ुब मेंये तिश्ना-लबी मुझ को सहराओं में ले आई
जिस पे चलते हुए सोचा था कि लौट आऊँगाअब वो रस्ता भी मुझे शहर-बदर लगता है
पावँ पत्थर कर के छोड़ेगी अगर रुक जाइएचलते रहिए तो ज़मीं भी हम-सफ़र हो जाएगी
चलते चलते ये गली बे-जान होती जाएगीरात होती जाएगी सुनसान होती जाएगी
मैं शाहराह नहीं रास्ते का पत्थर हूँयहाँ सवार भी पैदल उतर के चलते हैं
सवाल ये है कि आपस में हम मिलें कैसेहमेशा साथ तो चलते हैं दो किनारे भी
चलते हो तो चमन को चलिए कहते हैं कि बहाराँ हैपात हरे हैं फूल खिले हैं कम-कम बाद-ओ-बाराँ है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books