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ग़ज़ल
गुल-एज़ार और भी यूँ रखते हैं रंग और नमक
पर मिरे यार के चेहरे का सा ढंग और नमक
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
ढंग की बात कहे कोई, तो बोलूँ मैं भी
मतलबी हूँ, किसी मतलब से अलग बैठा हूँ
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
क़सम दे कर उन्हें ये पूछ लो तुम रंग-ढंग उस के
तुम्हारी बज़्म में कुछ दोस्त भी दुश्मन के बैठे हैं
दाग़ देहलवी
ग़ज़ल
हवा में उड़ के सैर-ए-आलम-ए-ईजाद करते हैं
फ़रिश्ते दंग हैं वो काम आदम-ज़ाद करते हैं