आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "dar-parda"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "dar-parda"
ग़ज़ल
दरीचों को तो देखो चिलमनों के राज़ तो समझो
उठेंगे पर्दा-हा-ए-बाम-ओ-दर आहिस्ता आहिस्ता
मुस्तफ़ा ज़ैदी
ग़ज़ल
राज़-ए-दर-पर्दा का पर्दा ख़ुद-बख़ुद उठ जाएगा
बस फ़क़त उन से नज़र दो-चार हो जाने को है
अब्दुल करीम मजरूह सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
दिलवाएँ मुझे गालियाँ ग़ैरों से सर-ए-बज़्म
ओ शोख़ ये दर-पर्दा शरारत नहीं अच्छी