आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "daur-e-jaam"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "daur-e-jaam"
ग़ज़ल
न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है
नई दुनिया के रिंदों में ख़ुदा का नाम चलता है
शकील बदायूनी
ग़ज़ल
अभी इक आस है साक़ी कि दौर-ए-जाम आता है
उलट दें मै-कदा रिंदों को ये भी काम आता है
शिफ़ा ग्वालियारी
ग़ज़ल
पन्ना लाल नूर
ग़ज़ल
था बज़्म-ए-ग़ैर में जो वहाँ शग़्ल-ए-दौर-ए-जाम
दर्द-ए-जिगर का था यहाँ दौरा तमाम रात