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ग़ज़ल
अपने दिल को न करे अब कोई हल्का 'आज़र'
वर्ना मैं जाऊँगा इक बोझ सा दिल पर ले कर
मुश्ताक़ आज़र फ़रीदी
ग़ज़ल
ले चला फिर मुझे दिल यार-ए-दिल-आज़ार के पास
अब के छोड़ आऊँगा ज़ालिम को सितमगार के पास
मुबारक अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
क्या गुज़र कीजिए सय्याद-ए-दिल-आज़ार के पास
बर्ग-ए-गुल फेंकता है मुर्ग़-ए-गिरफ़्तार के पास
अब्दुल हादी वफ़ा
ग़ज़ल
वादों के जंगल में 'आज़र' हम तो बरसों भटके हैं
आप करें क्यूँ दिल पे भरोसा आप ये धोका खाएँ क्यूँ
कफ़ील आज़र अमरोहवी
ग़ज़ल
दिल के बारे में उन्हें 'आज़र' बता देना कि वो
एक शीशा है मगर पत्थर से टकराया हुआ
कफ़ील आज़र अमरोहवी
ग़ज़ल
उठते ही मैं जल उठता हूँ इक नींद से 'आज़र'
करता है मिरे दिल को कबाब ऐसा कोई ख़्वाब
दिलावर अली आज़र
ग़ज़ल
गिला किस से करें अग़्यार-ए-दिल-आज़ार कितने हैं
हमें मालूम है अहबाब भी ग़म-ख़्वार कितने हैं