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ग़ज़ल
तुम्हारे ख़ून से मेरी रगों में ख़्वाब रौशन है
तुम्हारी आदतों में ख़ुद को ढलते मैं ने देखा है
आलोक श्रीवास्तव
ग़ज़ल
हमें उन से मोहब्बत है ज़रूरत से ज़ियादा ही
उन्हें हम से शिकायत है ज़रूरत से ज़ियादा ही
आदित्य श्रीवास्तव शफ़क़
ग़ज़ल
भवेश दिलशाद
ग़ज़ल
भूल बैठे सारी दुनिया आशिक़ी की ख़ातिर
आशिक़ी भी छोड़ दी फिर नौकरी की ख़ातिर