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ग़ज़ल
ख़ूब है ख़ूब उड़ा ऐ शब-ए-फ़ुर्क़त के मज़े
लुत्फ़ हर-हाल में देते हैं मोहब्बत के मज़े
मोहम्मद लुतफ़ुद्दीन ख़ान लुत्फ़
ग़ज़ल
मैं चराग़-ए-शब-ए-हस्ती हूँ ज़िया क्या माँगूँ
ज़िंदा रहना है तो चलने के सिवा क्या माँगूँ
बद्र शम्सी
ग़ज़ल
हमारे दरमियाँ अहद-ए-शब-ए-महताब ज़िंदा है
हवा चुपके से कहती है अभी इक ख़्वाब ज़िंदा है
नोशी गिलानी
ग़ज़ल
हंगाम-ए-शब-ओ-रोज़ में उलझा हुआ क्यूँ हूँ
दरिया हूँ तो फिर राह में ठहरा हुआ क्यूँ हूँ
अशफ़ाक़ हुसैन
ग़ज़ल
कुछ हम से ज़ुल्मत-ए-शब-ए-हिज्राँ न पूछिए
ज़ख़्मी दिलों से दर्द का उनवाँ न पूछिए