aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "engineer"
सारे इल्ज़ाम भूल जाता हूँमैं तो दुश्नाम भूल जाता हूँ
धूप बारिश हवा कमर-बस्ताऔर दरीचे में एक गुलदस्ता
फूल ख़ुश्बू चाँदनी महताब वोपर मिरी ख़ातिर है कोई ख़्वाब वो
गुल-ओ-गुलज़ार गुहर चाँद सितारे बच्चेरंग-ओ-बू नूर के पैकर हैं ये सारे बच्चे
है ऐसा वक़्त कि ख़ुद पर करम किया जाएज़रूरतों को ज़रा अपनी कम किया जाए
बहुत ख़ूब नक़्शा मिरे घर का हैकोई ख़्वाब फिर भी नए घर का है
हमीं तो हैं जो तिरे साथ चलते रहते हैंवगर्ना लोग तो रस्ते बदलते रहते हैं
किसी के बिछड़ने का डर ही नहींसफ़र में कोई हम-सफ़र ही नहीं
दरख़्तों पर परिंदे बोलते हैंनिकल घर से कि रस्ते बोलते हैं
आँख हो और कोई ख़्वाब न होनाज़िल ऐसा कहीं अज़ाब न हो
बात में कुछ मगर बयान में कुछरंग बदला हर एक आन में कुछ
फ़ैसले वो न जाने कैसे थेरात की रात घर से निकले थे
सुब्ह का धोका हुआ है शाम परचाँद को देखा अचानक बाम पर
शजर में शजर सा बचा कुछ नहींहवाओं से फिर भी गिला कुछ नहीं
ये सच है वफ़ा उस ने वा'दा कियातमाशा मगर कुछ ज़ियादा किया
आसमाँ पर बने थे चेहरे सेलोग याद आए भूले-बिसरे से
शुक्र हम ने न कुछ शिकायत कीबात है अपनी अपनी ख़सलत की
उँगली फ़िगार कोई न ख़ूँ में क़लम हुआकब हम से अपने दर्द का क़िस्सा रक़म हुआ
छाँव नहीं शजर नहींऔर तू हम-सफ़र नहीं
कई चेहरों में देखा जा रहा हूँज़माने की नज़र का वाहिमा हूँ
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