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ग़ज़ल
फ़क़त माल-ओ-ज़र-ए-दीवार-ओ-दर अच्छा नहीं लगता
जहाँ बच्चे नहीं होते वो घर अच्छा नहीं लगता
अब्बास ताबिश
ग़ज़ल
माल-ओ-ज़र पास है ये फिर भी ख़रीदार नहीं
तेरे उश्शाक़ को दुनिया से सरोकार नहीं
मोहम्मद मुस्तहसन जामी
ग़ज़ल
ख़ुदी के जोश में फ़िक्र-ए-मआल-ए-कार नहीं
जिसे है होश का दावा वो होशियार नहीं