aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "flash-back"
क्या होगी फ़लाह बअ'द-ए-मुर्दनजीते तो सदा अज़ाब देखा
फ़क़ीर दोस्त जो हो हम को सरफ़राज़ करेकुछ और फ़र्श ब-जुज़ बोरिया नहीं रखते
अहल-ए-वफ़ा की जान थे दुश्वार रास्तेफूलों का फ़र्श बन गए पुर-ख़ार रास्ते
एक सन्नाटा सा आलम में था लेकिन मैं नेफ़त्ह बाब-ए-असर-ए-नाला-ओ-फ़र्याद किया
कोई है बात कई बार बुलाते हैं मुझेबाँटने ग़म मिरा ग़म-ख़्वार बुलाते हैं मुझे
आप अब आए हैं फ़स्ल-ए-गुल के बअ'दफूल जब उम्मीद के मुरझा गए
फिर इस के बाद मनाया न जश्न ख़ुश्बू कालहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते
ब-हर-तरीक़ उसे मिस्मार करते रहना हैकभी सुख़न तो कभी वार करते रहना है
फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ चुभे तो कोई मसअला नहींचुभने लगे बहार तो हैरत की बात है
मोहतसिब से सलाह कीजिएगामय को चंदे मुबाह कीजिएगा
होश ओ ख़िरद से बेगाना बन जाहर फ़स्ल-ए-गुल में दीवाना बन जा
अब के फ़स्ल-ए-ग़म नहीं लाना इधरआने वाले मौसमों से बात कर
हो एक बार का रोना तो रोऊँ भी दिल कोये आइना तो कई बार पाश पाश हुआ
छोड़ कर घर-बार अपना हसरत-ए-दीदार मेंइक तमाशा बन के आ बैठा हूँ कू-ए-यार में
ज़-बस-कि मश्क़-ए-तमाशा जुनूँ-अलामत हैकुशाद-ओ-बस्त-ए-मिज़्हा सीली-ए-नदामत है
न अपने-आप को इस तरह दर-ब-दर रखतेपलट के आते अगर हम भी कोई घर रखते
ख़याल-ओ-ख़्वाब में कब तक ये गुफ़्तुगू होगीउठाओ जाम कि अब बात रू-ब-रू होगी
ब-सद-ख़िराम रह-ए-ज़ीस्त पर चला जाताजो अपने सीनों से ख़ौफ़-ओ-ख़तर चला जाता
ज़रा ज़रा सी बात पर वो मुझ से बद-गुमाँ रहेजो रात दिन थे मेहरबाँ वो अब न मेहरबाँ रहे
आदमियत के सभी पैमाने हो जाते हैं पाशभूक ऐसी जागती है पेट भर जाने के बा'द
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