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ग़ज़ल
दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ज़माना क़िस्सा-ए-दार-ओ-रसन को भूल न जाए
किसी के हल्क़ा-ए-गेसू में वो कशिश ही नहीं
आल-ए-अहमद सुरूर
ग़ज़ल
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
हुआ है अबरू-ए-जानाँ से दिल-ए-बेताब सद-पारा
मुक़ाबिल हो नहीं सकता दम-ए-शमशीर से काग़ज़
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
नज़'अ में आए हैं सद अफ़सोस जीते-जी न आए
वो हैं आने को तो अब तय्यार हैं जाने को हम
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
हिना-ए-नाख़़ुन-ए-पा हो कि हल्क़ा-ए-सर-ए-ज़ुल्फ़
छुपाओ भी तो ये जादू निकल ही आते हैं
मोहम्मद दीन तासीर
ग़ज़ल
क्यूँकर न क़ुर्ब-ए-हक़ की तरफ़ दिल मिरा कीजिए
गर्दन असीर-ए-हल्क़ा-ए-हबल-उल-वरीद है