आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "halqa-e-ushshaaq"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "halqa-e-ushshaaq"
ग़ज़ल
ज़माना क़िस्सा-ए-दार-ओ-रसन को भूल न जाए
किसी के हल्क़ा-ए-गेसू में वो कशिश ही नहीं
आल-ए-अहमद सुरूर
ग़ज़ल
दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
लश्कर-ए-क़ल्ब-ए-सफ़-ए-उश्शाक़ में है ग़लग़ला
यक्का-ताज़-ए-आह कूँ किस ने किया है ना-रसीद
सिराज औरंगाबादी
ग़ज़ल
बुल-हवस जामा-ए-उर्यानी-ए-उश्शाक़ को देख
तू गरेबान से क्यूँ अपना गला बाँधे है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
तुझ बर में सजन जल्वा-नुमा सुर्ख़ क़बा देख
ख़ून-ए-दिल-ए-उश्शाक़ ने फिर जोश किया है
मिर्ज़ा दाऊद बेग
ग़ज़ल
हल्क़ा-ए-चशम-ए-सनम लिख के ये कहता है क़लम
बस कि मरकज़ से क़दम अपना न बाहर होगा
भारतेंदु हरिश्चंद्र
ग़ज़ल
क्या बिना-ए-ख़ाना-ए-उश्शाक़ बे-बुनियाद है
ढल गया सर से मिरे साया तिरी दीवार का
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
ग़ज़ल
पाया सियाह-बख़्ती-ए-उश्शाक़ ने भी औज
फ़ीरोज़ा-ए-फ़लक पे किया कुंदा नाम-ए-ज़ुल्फ़
अब्दुल्ल्ला ख़ाँ महर लखनवी
ग़ज़ल
हर बरहमन भी दीद का मुश्ताक़ है सो है
उस बुत को पास-ए-ख़ातिर-ए-उश्शाक़ है सो है