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ग़ज़ल
किया तकमील-ए-नक़्श-ए-ना-तमाम-ए-शौक़ की ख़ातिर
जौ तुम से हो सका तुम ने जौ हम से हो सका हम ने
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
ग़ज़ल
नहीं है गेहूँ मयस्सर तो जौ ग़नीमत है
नहीं है हूर जो बीवी सियाह-फ़ाम तो है
वहिद अंसारी बुरहानपुरी
ग़ज़ल
जलसा-ए-आम में दिक़्क़त नहीं होती उन को
जो समझते हैं इशारों में कलाम-ए-मख़्सूस
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
ग़ज़ल
जौ ये बिस्मिल हया से है तो वो मजरूह देखे से
निगाह-ए-नाज़ उस क़ातिल की ख़ंजर यूँ भी है यूँ भी
क़ैसर हैदरी देहलवी
ग़ज़ल
कैसे आ पहुँची है गुलशन की हवा ज़िंदाँ में
दिल का जौ ज़ख़्म था इक फूल बना ज़िंदाँ में
मंज़ूर आरिफ़
ग़ज़ल
वो क्या जाने नसीम-ए-सुब्ह-दम की मुश्क-अफ़्शानी
बहाइम की तरह जो दिन चढ़े बेदार होता है