aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jham"
उस को भी तो कहाँ मिली दुनियाजिस ने दुनिया के ताम-झाम करे
बताओ हाथ में उल्फ़त का जाम किस का थातुम्हारे राज भवन में क़याम किस का था
देख कर ये ज़ुल्फ़ बादल तू बतागर न बरसें ये झमाझम क्या करें
मैं आया काम किया अपना और चल भी दियाज़माना बैठा रहा अपना ताम-झाम लगाए
पै-ब-पै आए सजल तारों के मानिंद ख़यालमेरी तन्हाई पे शब हुस्न झमाझम बरसा
मैं आसमान की दावत क़ुबूल कर लूँगामगर ज़मीं के सिवा कोई ताम-झाम न हो
नयन में दिल की गुलाबी का अक्स झूम रहा हैदुखों की धूम है आलम शराब-ख़ाना हुआ है
मैं क़ैस हूँ सो मुझे दश्त में ही रहने दोनहिं जी पाऊँगा ये ताम-झाम करते हुए
नज़र के चौक पे बारिश झमाझम गिर रही हैतो दिल के रूम में गाने पुराने लग गए हैं
कोई गोद में झम से आ ही गया हैतसव्वुर हमें जब बँधा है किसी का
दुनिया के ताम-झाम में उलझा था इस क़दरजो चार दिन थी जीने की मोहलत निकल गई
यादों के अब्र जब भी छाएँगे ज़ेहन-ओ-दिल परबे-साख़्ता झमाझम बहने लगेंगी आँखें
प्यासी जोगन धरती की सिसकी सुन कर रम हो न सकाफिर तो झमाझम टूट के बरसे बादल मस्त मलंग के दुख
रास्ते घर तमाम पत्थर केहर तरफ़ ताम-झाम पत्थर के
उस ने भी अपना हुस्न सजाया नहीं कभीमुझ को भी ताम-झाम का मतलब नहीं पता
जीते-जी हाल पूछने का भी समय न थामरने के बा'द कर रहे हैं ताम-झाम लोग
हमारी बात में सुन ज़म का रम्ज़ हैगा क्याकिसी भी पेच किसी ख़म का रम्ज़ हैगा क्या
सादगी शानदार है 'ज़र्रा'फिर भी थोड़ा तो ताम-झाम रखो
बूँदा-बाँदी से मज़ीद आग भड़क उठती हैमुझ पे कीजे कभी बारिश तो झमाझम कीजे
फ़लक पे अब्र भी अंजुम भी अब्र-ए-बाराँ भीमगर ज़मीं पे झमाझम का रम्ज़ हैगा क्या
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