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ग़ज़ल
इल्म-ओ-जाह-ओ-ज़ोर-ओ-ज़र कुछ भी न देखा जाए है
बज़्म-ए-साक़ी में दिलों का ज़र्फ़ जाँचा जाए है
आनंद नारायण मुल्ला
ग़ज़ल
गुल-गूना-ए-तरक़्क़ी-तहज़ीब-ओ-'इल्म से
शुक्र-ए-ख़ुदा कि सुर्ख़ हैं रुख़्सार आज-कल
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
पर-फ़िशाँ अश'आर हैं या है फ़रिश्तों का नुज़ूल
या 'अदम ने इक बला-ए-नागहानी छोड़ दी
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
मरता हूँ और जा नहीं सकता सू-ए-अदम
मुझ ना-तवाँ को तौक़-ओ-सलासिल से क्या ग़रज़
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
क़ब्र में सोएँगे आराम से अब ब'अद-ए-फ़ना
आएगा ख़्वाब-ए-अदम दीदा-ए-बेदार के पास