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ग़ज़ल
चलती गाड़ी नाम का रिश्ता क्या मोहन क्या राधा आज
बन के सँवर के रास रचा के मोहन आज मनाए कौन
किश्वर नाहीद
ग़ज़ल
हुई है माने-ए-ज़ौक़-ए-तमाशा ख़ाना-वीरानी
कफ़-ए-सैलाब बाक़ी है ब-रंग-ए-पुम्बा रौज़न में