आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mare.n"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "mare.n"
ग़ज़ल
नाज़ ओ अदा ओ ग़म्ज़ा निगह पंजा-ए-मिज़ा
मारें हैं एक दिल को ये पिल पिल के चार पाँच
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
उस के नाम पे मारें खाना अब ए'ज़ाज़ हमारा
और किसी की ये 'इज़्ज़त औक़ात नहीं देखी
उबैदुल्लाह अलीम
ग़ज़ल
शायद रक़ीब डूब मरें बहर-ए-शर्म में
डूबेंगे मौज-ए-अश्क की तुग़्यानियों में हम
मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता
ग़ज़ल
हम जिएँ या कि मरें कुछ नहीं ग़म शौक़ से आप
मसनद-ए-नाज़ पे फ़रमाइए एज़ाज़ से रम्ज़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
जब बन पड़ी तो शैख़-जी शैख़ी न मारें क्या
हम से भी फिर तो होवें करामातें ठीक-ठीक