आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mauja-e-sail-e-balaa"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "mauja-e-sail-e-balaa"
ग़ज़ल
दिल अपना हरीफ़-ए-सैल-ए-बला अब क्या कहें कितना टूट गया
आज और थपेड़े टकराए आज और किनारा टूट गया
महशर बदायुनी
ग़ज़ल
मसील-ए-सैल-ए-रवाँ दश्त-ओ-जू में गुज़री है
हयात हिज्र के तौक़-ए-गुलू में गुज़री है