आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "muddato.n"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "muddato.n"
ग़ज़ल
मुद्दतों बा'द उस ने आज मुझ से कोई गिला किया
मंसब-ए-दिलबरी पे क्या मुझ को बहाल कर दिया
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
गया तो इस तरह गया कि मुद्दतों नहीं मिला
मिला जो फिर तो यूँ कि वो मलाल में मिला मुझे
मुनीर नियाज़ी
ग़ज़ल
भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए
ख़ुमार बाराबंकवी
ग़ज़ल
घर में दीपक ही जला है न कोई शम-ए-वफ़ा
मुद्दतों दिल ही जला है तिरे जाने के बाद