आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "paraan"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "paraan"
ग़ज़ल
लड़ते लड़ते आख़िर इक दिन पंछी की ही जीत हुई
प्राण पखेरू ने तन छोड़ा ख़ाली पिंजरा छूट गया
दीप्ति मिश्रा
ग़ज़ल
क्यूँकि निकले तेरा उस का दिल में पैकाँ छोड़ कर
जाए बैज़े को कहाँ ये मुर्ग़-ए-पर्रां छोड़ कर
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
तिरा रूप रूह के रू-ब-रू तिरी प्रीत प्रान में मू-ब-मू
तू कमाल-ए-हुस्न-ए-कलाम है तू मिसाल माह-ए-तमाम है
नासिर शहज़ाद
ग़ज़ल
देखिए राह-ए-अदम में और पेश आता है क्या
होश पर्रां हो रहे हैं पहली मंज़िल देख कर
शेर सिंह नाज़ देहलवी
ग़ज़ल
वो एक लम्हा-ए-पर्रां वो एक साअ'त-ए-दीद
हिना ब-दस्त भी है लाला-पैरहन भी है
सुलैमान अरीब हैदराबादी
ग़ज़ल
ग़ुबार-ए-रंग-ए-पर्रां है फरेरा तेरी रायत का
शिकस्त-ए-क़ल्ब-ए-आशिक़ ग़लग़ला है तेरी नुसरत का