aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "parvardigaar"
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिनदेखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के
ग़ज़ब का हुस्न है आराइशें क़यामत कीअयाँ है क़ुदरत-ए-परवरदिगार ईद के दिन
मुझ सा न दे ज़माने को परवरदिगार दिलआशुफ़्ता दिल फ़रेफ़्ता दिल बे-क़रार दिल
परवर-दिगार तू ने समुंदर तो दे दिएअब मेरे ख़ुश्क होंटों को सहरा की प्यास दे
न बदरक़ा है न कोई रफ़ीक़ साथ अपनेफ़क़त इनायत-ए-परवर-दिगार राह में है
इस वक़्त तक तो वज़्अ' में आया नहीं है फ़र्क़तेरा करम शरीक जो पर्वरदिगार था
पेश आए लाख रंज अगर इक ख़ुशी हुईपरवर-दिगार ये भी कोई ज़िंदगी हुई
अब तक असीर-ए-दाम-ए-फ़रेब-ए-हयात हूँमुझ को भुला दिया मिरे पर्वरदिगार ने
पीता हूँ मैं शराब-ए-मोहब्बत तो क्या हुआपीता है ये शराब तो पर्वरदिगार भी
परवरदिगार जानता है तू दिलों के हालमैं जी न पाऊँगा जो उसे कुछ भी हो गया
नाक़ूस बिन के पूछने जाऊँ अगर मिज़ाजबुत भी कहेंगे शुक्र है परवर-दिगार का
वो शख़्स आ के मेरे महल्ले में बस गयामुझ पर निगाह पड़ गई परवरदिगार की
ऐ 'शफ़क़' किस ने बिगाड़ा है इसेकौन है पर्वरदिगार-ए-ज़िंदगी
जिस का कोई नहीं ज़माने मेंउस का पर्वरदिगार होता है
सिपाह-ए-शाम के नेज़े पे आफ़्ताब का सरकिस एहतिमाम से परवर-दिगार-ए-शब निकला
ग़रीब-ए-शहर तवंगर से कह रहा था कि तूअमीर-ए-शहर है परवरदिगार थोड़ी है
पूछें वो काश हाल दिल-ए-बे-क़रार काहम भी कहें कि शुक्र है पर्वरदिगार का
वो रंग-ए-'इश्क़ में परवरदिगार आ जाएदिखा दूँ आग को दामन बहार आ जाए
पर्वरदिगार मेरे गुनाहों को बख़्श देमुझ को सुनाई देती नहीं अब अज़ान तक
हिम्मत न हार दे कोई मंज़िल के सामनेपरवरदिगार यूँ भी कोई ना-तवाँ न हो
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