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ग़ज़ल
बदन की वादियों में गुम कहीं हो जाती है धड़कन
कभी पर्वत से दिल के याद का जब झरना गिरता है
संदीप ठाकुर
ग़ज़ल
ज़रा से दिल में रखने पड़ते हैं पर्वत से ग़म हम को
ज़रा सी बात पर आँसू बहाना छूट जाता है