aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "parveen-shakir"
पूरा दुख और आधा चाँदहिज्र की शब और ऐसा चाँद
इक हुनर था कमाल था क्या थामुझ में तेरा जमाल था क्या था
बहुत रोया वो हम को याद कर केहमारी ज़िंदगी बरबाद कर के
अपनी ही सदा सुनूँ कहाँ तकजंगल की हवा रहूँ कहाँ तक
रुकने का समय गुज़र गया हैजाना तिरा अब ठहर गया है
दिल पे इक तुर्फ़ा क़यामत करनामुस्कुराते हुए रुख़्सत करना
शब वही लेकिन सितारा और हैअब सफ़र का इस्तिआ'रा और है
अब भला छोड़ के घर क्या करतेशाम के वक़्त सफ़र क्या करते
क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वालाज़ख़्म ही ये मुझे लगता नहीं भरने वाला
तेरी ख़ुश्बू का पता करती हैमुझ पे एहसान हवा करती है
अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ सेज़मीं की ख़ैर माँगें आसमाँ से
खुली आँखों में सपना झाँकता हैवो सोया है कि कुछ कुछ जागता है
क़दमों में भी तकान थी घर भी क़रीब थापर क्या करें कि अब के सफ़र ही अजीब था
जगा सके न तिरे लब लकीर ऐसी थीहमारे बख़्त की रेखा भी 'मीर' ऐसी थी
समुंदरों के उधर से कोई सदा आईदिलों के बंद दरीचे खुले हवा आई
जब साज़ की लय बदल गई थीवो रक़्स की कौन सी घड़ी थी
बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखनामैं समुंदर देखती हूँ तुम किनारा देखना
कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिएपानी को अब तो सर से गुज़र जाना चाहिए
तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथऐसी बरसातें कि बादल भीगता है साथ साथ
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books