आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ra.ng-e-daur-e-qamar"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "ra.ng-e-daur-e-qamar"
ग़ज़ल
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
क्या वज्ह तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम में मज़ा नहीं
ऐ दौर-ए-चर्ख़ आज वो शायद नहीं शरीक
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
सुरूर-ओ-कैफ़ से पुर है ग़म-ए-दौर-ए-जहाँ साक़ी
नज़र के सामने रक़्साँ है तास-ए-आसमाँ साक़ी
मसरूर शफ़क़ी
ग़ज़ल
पन्ना लाल नूर
ग़ज़ल
मख़मूर सईदी
ग़ज़ल
कितना बे-ख़ौफ़ था वो ग़ार की तारीकी में
आज हाथों में लिए शम्स-ओ-क़मर चीख़ता है
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
है सौ अदाओं से उर्यां फ़रेब-ए-रंग-ए-अना
बरहना होती है लेकिन हिजाब-ए-ख़्वाब के साथ