आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "rahzan-e-aql"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "rahzan-e-aql"
ग़ज़ल
फ़ी-ज़माना है यही मस्लहत-ए-अक़्ल-ओ-शुऊर
दिल में ख़्वाहिश कोई उभरे तो दबा ली जाए
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
ग़ज़ल
इसी क़दर तो है सरमाया-ए-तजस्सुस-ए-अक़्ल
कि कुछ ज़मीं की ख़बर है कुछ आसमाँ का पता
बेताब अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
उन से बच जाए जो ईमाँ तो ग़नीमत समझो
ख़ुश निगाहों में बहुत रहज़न-ए-दीं होते हैं