आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "seb"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "seb"
ग़ज़ल
अमीर मीनाई
ग़ज़ल
मैं वो मजनूँ हूँ जो निकलूँ कुंज-ए-ज़िंदाँ छोड़ कर
सेब-ए-जन्नत तक न खाऊँ संग-ए-तिफ़्लाँ छोड़ कर
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
फ़रेब-ए-हुस्न से गब्र-ओ-मुसलमाँ का चलन बिगड़ा
ख़ुदा की याद भूला शैख़ बुत से बरहमन बिगड़ा
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
ख़ाक में भी जो मिलूँ मैं तो किसी सहरा में
तुम से मिट्टी भी न ऐ गब्र ओ मुसलमाँ माँगूँ
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
क्या मज़े का है तिरे सेब-ए-ज़नख़दाँ का ख़ाल
लज़्ज़त-ए-मेवा-ए-फ़िरदौस है इस दाने में
सिराज औरंगाबादी
ग़ज़ल
ज़क़न है सेब तो उन्नाब है लब-ए-शीरीं
नहीं है सर्व वो ख़ुश-क़द जो मेवा-दार न हो
इमाम बख़्श नासिख़
ग़ज़ल
किस किस का दिल धड़केगा और कौन मलेगा हाथों को
पक्कीं से जब अंगिया में ये कच्चे सेब उछालेगी