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ग़ज़ल
हम ने भी छोड़ दिया मसलक-ए-अर्बाब-ए-वफ़ा
वो भी अब भूल गए शेवा-ए-बेदाद-गरी
सुलैमान अरीब हैदराबादी
ग़ज़ल
न वो इख़्लास-ओ-मोहब्बत है न वो मेहर-ओ-वफ़ा
शेवा-ए-जौर-ओ-जफ़ा-ओ-सितम इज़हार हुए
मीर मोहम्मदी बेदार
ग़ज़ल
तरब है शेवा-ए-रिंदान-ए-'आक़िबत-ना-शनास
जो गुल न था वो गुलिस्ताँ में मुस्कुरा न सका
नुशूर वाहिदी
ग़ज़ल
हुस्न-ए-अख़्लाक़ वफ़ा शेवा-ए-तस्लीम-ओ-रज़ा
ज़िंदा हर दौर में रहने के हैं सामाँ जैसे
ख़लील अंसारी एडवोकेट
ग़ज़ल
मैं हूँ वो बुलबुल-ए-महव-ए-असीरी-ए-बेदाद
रहेगी रूह भी बा'द-ए-फ़ना फ़िदा-ए-क़फ़स
असद अली ख़ान क़लक़
ग़ज़ल
तू असीर-ए-आबरू-ए-शेवा-ए-पिंदार-ए-हुस्न
मैं गिरफ़्तार-ए-निगाह-ए-ज़िंदगी-ए-मुख़्तसर
अमजद इस्लाम अमजद
ग़ज़ल
इश्क़-ए-ख़ूबाँ में हुआ रंज तो राहत समझा
शुक्र मैं ने एवज़-ए-शिकवा-ए-बेदाद किया