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ग़ज़ल
आमिर अमीर
ग़ज़ल
असीर ऐ दोस्त तेरे आशिक़ ओ माशूक़ दोनों हैं
गिरफ़्तार आहनी ज़ंजीर का ये वो तिलाई का
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
तिलाई रंग पर क्यूँ कर न उन लोगों को ग़र्रा हो
ये ज़र वो चेहरा है ख़ातिर में नख़वत आ ही जाती है
इमदाद अली बहर
ग़ज़ल
है तसव्वुर रोज़-ओ-शब किस की तिलाई रंग का
चश्म-ए-नर्गिस की तरह ज़रदार आँखें हो गईं
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
ग़ज़ल
मू-ए-आतिश-दीद साँ बल खाए वो मू-ए-कमर
मैं जो लिक्खूँ गर्म मज़मूँ उस तिलाई डाब का
मुनीर शिकोहाबादी
ग़ज़ल
तश्त-ए-तिलाई में सूरज के एक इक अश्क परख लेना
वक़्त-ए-सहर इल्ज़ाम लगाना रात गुज़रती जाती है
सिराज लखनवी
ग़ज़ल
तिलाई-रंग ये क्या क्या चले हैं तलवारें
किसी के क़ब्ज़े में वो कुंज-ए-ज़र नहीं आता