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ग़ज़ल
तुम्हारा प्यार है न जो सुनो रत्ती बराबर है
ये ख़ुद ही देख लो तोले को माशा कौन करता है
अली रज़ा रज़ी
ग़ज़ल
मिट्टी के सब मिट्टी होना क्या पछताना क्या रोना
भेद भरम सब फ़ाश हुए जब दीन धर्म क्या तोले हो
इरफ़ान अहमद मीर
ग़ज़ल
है यहाँ पैमाना माल-ओ-नक़्द ही लेकिन वहाँ
ज़र्फ़ की मीज़ान पर ही लोग तोले जाएँगे
आदित्य पंत नाक़िद
ग़ज़ल
देखिए किस जन्नती के आज खुलते हैं नसीब
तेग़ क्यूँ तोले हैं ये चिल्ले चढ़ाए किस लिए