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ग़ज़ल
वक़्त-ए-इमदाद है ऐ हिम्मत-ए-गुस्ताख़ी-ए-शौक़
शौक़-अंगेज़ हैं उन के लब-ए-ख़ंदाँ क्या क्या
अख़्तर शीरानी
ग़ज़ल
ग़म नहीं मुझ को जो वक़्त-ए-इम्तिहाँ मारा गया
ख़ुश हूँ तेरे हाथ से ऐ जान-ए-जाँ मारा गया
इम्दाद इमाम असर
ग़ज़ल
कोई दौलत नहीं 'इमदाद' अपने दस्त ओ दामन में
फ़क़त यादों के सिक्के दिल तिजोरी में रखे होंगे
इम्दाद हमदानी
ग़ज़ल
फ़र्श-ए-राहत पर मुझे जिस वक़्त याद आता है यार
मुर्ग़-ए-दिल ऐसा फड़कता है कि उड़ जाती है नींद
इमदाद अली बहर
ग़ज़ल
इमदाद अली बहर
ग़ज़ल
क्या पिघलता जो रग-ओ-पै में था यख़-बस्ता लहू
वक़्त के जाम में था शोला-ए-तर ही कितना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
चलते हैं कू-ए-यार में है वक़्त-ए-इम्तिहाँ
हिम्मत न हारना दिल-ए-बीमार देखना