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ग़ज़ल
यार मुझ को देख ज़ा रोना तो उन सा हिज्र में
मुश्फ़िक़ाना कुछ नसीहत जबकि फ़रमाने लगे
रंगीन सआदत यार ख़ाँ
ग़ज़ल
खुली है आँख जोश-ए-इंतिज़ार-ए-यार-ए-जानी है
ब-मुश्किल दीदा-ए-ज़ंजीर ख़्वाब-ए-पासबानी है
नसीम देहलवी
ग़ज़ल
है ज़िक्र-ए-यार क्यूँ शब-ए-ज़िंदाँ से दूर दूर
ऐ हम-नशीं ये तर्ज़ ग़ज़ल का कभी न था
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
तू वफ़ादार है ऐ यार-ए-जना-कार कि तू
मैं वफ़ादार हूँ ऐ यार-ए-हिबा-कार कि तू
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
कब तसव्वुर यार-ए-गुल-रुख़्सार का फ़े'ल-ए-अबस
इश्क़ है इस गुलशन-ओ-गुलज़ार का फ़े'ल-ए-अबस
बहराम जी
ग़ज़ल
चलते हैं कू-ए-यार में है वक़्त-ए-इम्तिहाँ
हिम्मत न हारना दिल-ए-बीमार देखना
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
फ़िराक़-ए-यार में मेरा दिल-ए-मुज़्तर न ठहरेगा
तुम्हीं सोचो सुकूँ को ताइर-ए-बिस्मिल से क्या निस्बत
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
बे-रू-ओ-ज़ुल्फ़-ए-यार है रोने से काम याँ
दामन है मुँह पे अब्र-ए-नमत सुब्ह-ओ-शाम याँ
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
फ़रेब-ख़ुर्दा-ए-पैमान-ए-यार होना था
रहीन-ए-कश्मकश-ए-इंतिज़ार होना था
अब्दुर्रशीद ख़ान कैफ़ी महकारी
ग़ज़ल
ख़याल-ए-यार क्यूँ-कर आ गया तूफ़ान-ए-गिर्या में
ख़ुदा मालूम किस शय का बनाया पुल समुंदर में