हम जूँ चकोर ग़श हैं अजी एक यार पर

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

हम जूँ चकोर ग़श हैं अजी एक यार पर

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

MORE BYरंगीन सआदत यार ख़ाँ

    हम जूँ चकोर ग़श हैं अजी एक यार पर

    बुलबुल की तरह जी नहीं देते हज़ार पर

    गर जी में कुछ नहीं है तो देखे है क्यूँ मुझे

    उँगली को फेर फेर के तेग़े की धार पर

    पा-बोस-ए-यार की हमें हसरत है नसीम

    आहिस्ता आइओ तू हमारे मज़ार पर

    रुख़्सार पर नुमूद हुआ ख़त ख़बर भी है

    यानी कमर कसी है ख़िज़ाँ ने बहार पर

    'रंगीं' तो ले के बैठे हैं अस्बाब-ए-ऐश सब

    आवे ब-शर्त-ए-यार भी अपने क़रार पर

    स्रोत :
    • पुस्तक : intekhaab-e-sukhan(avval) (पृष्ठ 69)
    • रचनाकार : hasrat mohani
    • प्रकाशन : uttar pardesh urdu acadmy

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