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ग़ज़ल
मेरे साक़ी तेरे क़ुर्बां क्या कहूँ किस से कहूँ
ज़र्फ़-ए-मय-कश देख कर रंग-ए-तबीअ'त देख कर
राज़ चाँदपुरी
ग़ज़ल
चश्म-ए-साक़ी से गिरा जाता है ज़र्फ़-ए-मय-कशाँ
तोड़ दें साग़र जिन्हें एहसास-ए-बेश-ओ-कम हुआ
मानी नागपुरी
ग़ज़ल
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
कोई बादा-कश जिसे मय-कशी का तरीक़-ए-ख़ास न आ सका
ग़म-ए-ज़िंदगी की कशा-कशों से कभी नजात न पा सका
नरेश एम. ए
ग़ज़ल
ये बात अलग साक़ी नवाज़े न नवाज़े
हम मय-कदा-ए-इश्क़ के मय-ख़्वार रहे हैं
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
ग़ज़ल
मिरा माज़ी नज़र आया मुझे हाल-ए-हसीं हो कर
जो उन के साथ देखे थे वो मंज़र याद आते हैं
ए. डी. अज़हर
ग़ज़ल
मैं ऐ 'रियाज़' ख़ुश हूँ इक बोरिया ही मैं हूँ
पहले जो ज़र्फ़-ए-मय था अब ज़र्फ़ है वुज़ू का