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ग़ज़ल
बहुत ज़ोरों से हँस पड़ता हूँ मैं बिन बात के अक्सर
मैं यूँ आँसू बहाने के बहाने ढूँड लेता हूँ
चन्द्र शेखर वर्मा
ग़ज़ल
इस ज़माने में ख़मोशी से निकलता नहीं काम
नाला पुर-शोर हो और ज़ोरों पे फ़रियाद रहे
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
ग़ज़ल
जब मिला मुझ को समुंदर बस यही कहता मिला
प्यास ज़ोरों की लगी है और पानी चाहिए
प्रशांत शर्मा दराज़
ग़ज़ल
याद-ए-अय्यामे कि था ज़ोरों पे जज़्ब-ए-हुस्न-ओ-इश्क़
वो मिरे दिल का तड़पना बे-क़रारी आप की
तअशशुक़ लखनवी
ग़ज़ल
आ गले मिल दर्द का रिश्ता है अपने दरमियाँ
इतने ज़ोरों से न हिन्दोस्तान पाकिस्तान कर
परवेज़ मुज़फ़्फ़र
ग़ज़ल
हथकड़ी बेड़ी बड़ी ज़ोरों से पहनाई मुझे
ऐ जुनूँ शल हो गए अहल-ए-वतन के हाथ पाँव