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नज़्म
ऐ कि न-शिनासी ख़फ़ी रा अज़ जली हुशियार बाश
ऐ गिरफ़्तार-ए-अबु-बकर-ओ-अली हुशियार-बाश
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
थोड़ी सी मिठाई ताक़ पे थी मुट्ठी में चुराए बैठे हैं
अब्बू के भगाए भागे थे अम्मी के बुलाए बैठे हैं
शौकत परदेसी
नज़्म
ता-अबद आते रहेंगे
अबू-तालिब के बेटे हिफ़्ज़-ए-नामूस-ए-रिसालत की रिवायत के अमीं थे
इफ़्तिख़ार आरिफ़
नज़्म
शब-ए-ज़फ़ाफ़-ए-अबू-लहब थी मगर ख़ुदाया वो कैसी शब थी
अबू-लहब की दुल्हन जब आई तो सर पे ईंधन गले में
नून मीम राशिद
नज़्म
अपने फ़रज़ंद से फ़ारूक़-ए-मोअज़्ज़म ने कहा
तुम को है हालत-ए-असली की हक़ीक़त पे उबूर
शिबली नोमानी
नज़्म
बड़े ही शौक़ से मुझ को पढाती हैं लिखाती हैं
बड़े ही प्यार से जो पूछता हूँ वो बताती हैं