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नज़्म
नमी-गर्दीद को तह रिश्ता-ए-मअ'नी रिहा कर्दम
हिकायत बूद बे-पायाँ ब-ख़ामोशी अदा कर्दम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ये जल्वे पैकर-ए-शब-ताब के ये बज़्म-ए-शोहूद
ये मस्तियाँ कि मय-ए-साफ़-ओ-दुर्द सब बे-बूद
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
मिरे पाँव छू के निकल गई कोई मौज-ए-साज़ ब-कफ़ अभी
वो हलावतें मिरे हस्त ओ बूद में भर गईं
नून मीम राशिद
नज़्म
हर वक़्त मगर पढ़ते रहना कम-उम्रों का तो काम नहीं
सब अपनी अपनी कुर्सी पर सुध-बुध बिसराए बैठे हैं
शौकत परदेसी
नज़्म
फूलों पे रक़्स और न बहारों पे रक़्स कर
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद में ख़ारों पे रक़्स कर
शकील बदायूनी
नज़्म
हुस्न जब अफ़्सुर्दा फूलों की तरह पामाल था
जब मोहब्बत का ग़लत दुनिया में इस्ति'माल था
सीमाब अकबराबादी
नज़्म
इक जनाज़े को उठाए जा रहे थे चंद लोग
तुम ने पूछा क्या हुआ क्यूँ जा रहे हो तुम मलूल