aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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न ऐसी ख़ुश-लिबासियाँकि सादगी गिला करे
हर बार मेरे सामने आती रही हो तुमहर बार तुम से मिल के बिछड़ता रहा हूँ मैं
कारवाँ गुज़रे हैं जिन से उसी रानाई केजिस की इन आँखों ने बे-सूद इबादत की है
इसी मामूरे में आबाद थे यूनानी भीइसी दुनिया में यहूदी भी थे नसरानी भी
जिस पे पहले भी कई अहद-ए-वफ़ा टूटे हैंइसी दो-राहे पे चुप-चाप खड़ा रह जाऊँ
ख़ेमा-ए-अफ़्लाक का इस्तादा इसी नाम से हैनब्ज़-ए-हस्ती तपिश-आमादा इसी नाम से है
फिर कोई आया दिल-ए-ज़ार नहीं कोई नहींराह-रौ होगा कहीं और चला जाएगा
तुम्हें इक बात कहनी थीइजाज़त हो तो कह दूँ मैं
इसी सबब से फ़लक का गिला नहीं करतेतिरे फ़िराक़ में हम दिल बुरा नहीं करते
मैं यहाँ हूँ मगर उस कूचा-ए-रंग-ओ-बू मेंरोज़ की तरह से वो आज भी आया होगा
हुस्न और इश्क़ हम-आवाज़ ओ हम-आहंग हैं आजजिस में जलता हूँ उसी आग में जलना है तुझे
कि अब तुम मुझ को पहले से ज़ियादा याद आती होहै दिल ग़मगीं बहुत ग़मगीं
तुम्हारी अर्जुमंद अम्मी को मैं भूला बहुत दिन मेंमैं उन की रंग की तस्कीन से निमटा बहुत दिन में
यही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ हैयही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है
कहता है ज़माना जिस को ख़ुशी आती है नज़र कमयाब हमें
बिछा दिया गया बारूद उस के पानी मेंवो जू-ए-आब जो मेरी गली को आती थी
अम्न को जिन से तक़्वियत पहुँचेऐसी जंगों का एहतिमाम करें
वो थक चुका था और उस का तेशाउसी के सीने में गड़ चुका है
लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरीज़िंदगी शम्अ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी!
लैला-ए-नाज़ बरफ़्गंदा-नक़ाब आती थीअपनी आँखों में लिए दावत-ए-ख़्वाब आती थी
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