आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",GsFU"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",Gsfu"
नज़्म
गुफ़्त रूमी हर बना-ए-कुहना कि-आबादाँ कुनंद
मी न-दानी अव्वल आँ बुनियाद रा वीराँ कुनंद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ज़ेर-ए-लब अर्ज़ ओ समा में बाहमी गुफ़्त-ओ-शुनूद
मिशअल-ए-गर्दूं के बुझ जाने से इक हल्का सा दूद
जोश मलीहाबादी
नज़्म
उसे कहना दिसम्बर आ गया है
दिसम्बर के गुज़रते ही बरस इक और माज़ी की गुफा में डूब जाएगा
अर्श सिद्दीक़ी
नज़्म
तुम्हीं दे सकते हो इस का मिरी जानिब से जवाब
कि न पकड़े मुझे महशर में मिरा रब्ब-ए-ग़फ़ूर
शिबली नोमानी
नज़्म
इस तरह आख़िर हुआ दुनिया में नानक का ज़ुहूर
फ़र्श-ए-तिलवंडी पे उतरा अर्श से रब्ब-ए-ग़फ़ूर
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
नज़्म
यहाँ दीवार पर मैं ने चमकता चाँद छोड़ा था
हँसी के मोतियों की एक माला थी जो तुम ने गिफ़्ट में दी थी