आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",PFtH"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",pftH"
नज़्म
वो मेरी माँ मैं कभी जिस की पीठ पर न चढ़ा
वो मेरी माँ कभी कुछ जिस के कान में न रखा
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
साहिर लुधियानवी
नज़्म
कौन मरहम ज़ख़्म-ए-जाँ पर प्यार से रख पाएगा
दर्द की शिद्दत में मेरी पीठ को सहलाएगा
शहनाज़ परवीन शाज़ी
नज़्म
और तुम उस का हाथ हाथों में न ले पाओ
न आँखों ही में झाँको और न दिल की सल्तनत को फ़त्ह कर पाओ
सलीम कौसर
नज़्म
जीवन के अँधियारे पथ पर मिशअल ले कर निकलूँगा
धरती के फैले आँचल में सुर्ख़ सितारे भर दूँगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
हमेशा सब्ज़ रहेगी वो शाख़-ए-मेहर-अो-वफ़ा
कि जिस के साथ बंधी है दिलों की फ़तह ओ शिकस्त
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
हकीम जाने वो कैसी हिकमत से आश्ना था
शजीअ जाने कि बदर ओ ख़ैबर की फ़त्ह-मंदी का राज़ क्या था