aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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हम ने ये माना हमारे आन वाले मिट गएभोज से विक्रम से 'आली-शान वाले मिट गए
बरखा की बहारें छाती हैंमासूम घरों से भोर-भैए
किस तरह बन में आँखों के तारे को भेज दूँजोगी बना के राज-दुलारे को भेज दूँ
मगर भेज देती है पैग़ाम तक वोये पैग़ाम आते ही रहते हैं अक्सर
भोर भए मंदिर आई हैआई नहीं है माँ लाई है
कि हर रोज़ बस एक ही जानवरख़ुद ही शेर के ग़ार में भेज कर
अब जागो मेरे लालघर घर बिखरा भोर का कुंदन
भोग चुके हैं झूट को सच की तरहअब
इशरतें पास हुईं दूर हुए मन के रोगखाए जब माल-पूए दूध दही मोहन-भोग
ज़मीन से आसमाँ तक एक ही मंज़र सँवर जाएहमारे रास्तों पर आसमाँ अपनी गवाही भेज दे
जाता कहाँ है ख़ुद वो पकड़वाया जाता हैयानी फ़रिश्ता भेज के बुलवाया जाता है
इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए तुम अपने बोसेकाग़ज़ में लपेट कर भेज सकती हो
हम ऐसे निज़ाम को भोग रहे हैंजहाँ एक की बक़ा दूसरे की भूक पर क़ाबिज़ होने में है
मैं सरापा ख़ुद ही सवाल था सो कोई जवाब न लिख सकाकोई ऐसा ख़त मुझे भेज फिर
क़ादिर-ए-मुतलक़ है तू इन को दोबारा एज देइन शहीदों को तू दुनिया ही में वापस भेज दे
जूँही बोल दूँ इक दो तीन मैंफिर से भेज दूँ तुम को चीन मैं
जैसे कोई बन-बासी देवीकरमों का फल भोग चुकी हो
उस में अगली तस्वीर जो हैये भोर समय की दूरी पर
जल्दी जल्दी विकट गँवाए बिगड़ गई थी हालतजमे जमाए हाथी दादा भेज रहे थे ला'नत
ज़र्द होंटों पे कोई दुआ भेज देदोस्तों के लिए क़हक़हा भेज दे
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