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नज़्म
तमीज़-ए-बंदा-ओ-आक़ा फ़साद-ए-आदमियत है
हज़र ऐ चीरा-दस्ताँ सख़्त हैं फ़ितरत की ताज़ीरें
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मश्रिक-ओ-मग़रिब की क़ौमों के लिए रोज़-ए-हिसाब
इस से बढ़ कर और क्या होगा तबीअ'त का फ़साद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मिट नहीं सकता कभी मर्द-ए-मुसलमाँ कि है
उस की अज़ानों से फ़ाश सिर्र-ए-कलीम-ओ-ख़लील
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ज़र्रात का बोसा लेने को सौ बार झुका आकाश यहाँ
ख़ुद आँख से हम ने देखी है बातिल की शिकस्त-ए-फ़ाश यहाँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
नौ-ए-इंसाँ में ये सरमाया ओ मेहनत का तज़ाद
अम्न ओ तहज़ीब के परचम तले क़ौमों का फ़साद
साहिर लुधियानवी
नज़्म
तारिक़ क़मर
नज़्म
क्या कहा इंसाफ़ है इंसाँ का फ़र्ज़-ए-अव्वलीं
क्या फ़साद-ओ-ज़ुल्म का अब तुम में कस बाक़ी नहीं
जोश मलीहाबादी
नज़्म
हम ने रक्खी है यहाँ अम्न-ओ-अमाँ की बुनियाद
अपनी फ़ितरत में नहीं दहशत ओ दंगा ओ फ़साद
खालिद इरफ़ान
नज़्म
ये इंसाँ हाँ ये हैवाँ बद-तर अज़-शैताँ नहीं होते
फ़साद-ओ-शर जहाँ सोते हैं ख़्वाबों के मज़ारों में!
अख़्तर शीरानी
नज़्म
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
फ़साद-ए-ख़ल्क़ भी ख़ुद और फ़साद-ए-ज़ात भी ख़ुद
सफ़र का वक़्त भी ख़ुद जंगलों की रात भी ख़ुद
मुस्तफ़ा ज़ैदी
नज़्म
दिल पे क्यूँ कर फ़ाश हो जाते हैं आज़ादी के राज़
छेड़ते हैं किस तरह महफ़िल में बेदारी का साज़