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नज़्म
ज़मीर-ए-लाला में रौशन चराग़-ए-आरज़ू कर दे
चमन के ज़र्रे ज़र्रे को शहीद-ए-जुस्तुजू कर दे
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मैं शहीद-ए-जुस्तुजू था यूँ सुख़न-गुस्तर हुआ
ऐ तिरी चश्म-ए-जहाँ-बीं पर वो तूफ़ाँ आश्कार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सत्यपाल आनंद
नज़्म
मैं तिरे शहर में फिरता ही रहा सरगर्दां
शाह-राहों के हर इक मोड़ पे हैराँ हैराँ
मुसव्विर सब्ज़वारी
नज़्म
आ इधर ऐ दोस्त आ तू मुझ से छुप सकता नहीं
सई-ए-ख़ुद-पोशी है क्यों जब मैं तुझे तकता नहीं
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्म
ज़र्रा-ए-तारीक मेहर-ए-ज़ौ-फ़िशाँ होने को है
क़तरा-ए-नाचीज़ बहर-ए-बेकराँ होने को है