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नज़्म
रियाज़-ए-दहर में ना-आश्ना-ए-बज़्म-ए-इशरत हूँ
ख़ुशी रोती है जिस को मैं वो महरूम-ए-मसर्रत हूँ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ہر ايک سے آشنا ہوں ، ليکن جدا جدا رسم و راہ ميري
کسي کا راکب ، کسي کا مرکب ، کسي کو عبرت کا تازيانہ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
क्यूँ तबीअ'त को न हो बे-ख़ुदी-ए-शौक़ पे नाज़
हज़रत-ए-अब्र के क़दमों पे है ये फ़र्क़-ए-नियाज़
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
चश्म-ए-हक़-बीं के लिए इबरत के नज़्ज़ारे मिले
हस्ती-ए-इंसान पे जो ज़िंदगानी देख कर
मयकश अकबराबादी
नज़्म
सोज़िश-ए-ग़म से पिघल जा आह ऐ रेग-ए-रवाँ
ज़र्रे ज़र्रे में तेरे तस्वीर-ए-इबरत है निहाँ
सुरूर जहानाबादी
नज़्म
गुज़िश्ता सदियों की तारीख़ का वरक़ है ये कोट
ख़रीदो इस को कि इबरत का इक सबक़ है ये कोट