aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "موج_تجسس"
सर-ए-साहिल खड़ा हूँ फ़िक्र में गुम हूँसमुंदर कितना गहरा है
न मंज़िल का तअ'य्युन न रास्तों का पतासुलगती धूप तपते पत्थरों के सीने पर
हुआ ख़ेमा-ज़न कारवान-ए-बहारइरम बन गया दामन-ए-कोह-सार
इस सराए में मुसाफ़िर का क़यामएक लम्हा बे-यक़ीनी का
रक़्सशाम खड़ी है
ग़म किसी कोहना-ओ-बोसीदा वरक़ पर मौजूदसाल-हा-साल से मल्फ़ूज़ हिकायत की तरह
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