आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "پاکیزہ"
नज़्म के संबंधित परिणाम "پاکیزہ"
नज़्म
फिर ये इंसाँ आँ सू-ए-अफ़्लाक है जिस की नज़र
क़ुदसियों से भी मक़ासिद में है जो पाकीज़ा-तर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
रहमान फ़ारिस
नज़्म
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
फिर एक पाकीज़ा ज़िंदगी के लिए बहुत बे-क़रार हूँ मैं
मुझे मोहब्बत ने मासियत के जहन्नमों से बचा लिया है
नून मीम राशिद
नज़्म
वो पाकीज़ा शरारा बिजलियों ने जिस को धोया है
वो अँगारा कि जिस में ज़ीस्त ने ख़ुद को समोया है
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
जहाँ रंगत ही रंगत है जहाँ निकहत ही निकहत है
मोहब्बत हुक्मराँ है जिन के पाकीज़ा दयारों में!
अख़्तर शीरानी
नज़्म
है दसहरे में भी यूँ गो फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
पर दीवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है