आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ".grma"
नज़्म के संबंधित परिणाम ".grma"
नज़्म
जग के चारों कूट में घूमा सैलानी हैराँ हो कर
इस बस्ती के इस कूचे के इस आँगन में ऐसा चाँद
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
कोई मख़्फ़ी हरारत गर हमारे दिल को गरमा दे
हमारे जिस्म में फिर ज़िंदगी की रूह दौड़ा दे
अहमक़ फफूँदवी
नज़्म
दिन-रात जो खेला करते थे वो भाई हमारे फ़ेल हुए
दिन-रात जो घूमा करते थे वो भाई हमारे फ़ेल हुए
हसरत जयपुरी
नज़्म
बर्फ़-ज़ारों को तिरे अन्फ़ास ने गरमा दिया
तेरे इस्तिग़्ना ने तख़्त-ए-सल्तनत ठुकरा दिया
सीमाब अकबराबादी
नज़्म
इमरान शमशाद नरमी
नज़्म
उस वक़्त कहाँ तू होता है जब मौसम-ए-गर्मा का सूरज
दोज़ख़ की तपिश भर देता है दरियाओं में कोहसारों में
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
इन कटर आउट कटर से हो के बिल्कुल बे-नियाज़
बंद कर के आँख बस बल्ला घुमा जाता हूँ मैं