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नज़्म
तुम्हारे जजाने के ब-बा’द अपना ख़याल रखूँगा
दे-देखो ना कैसे मुस-मुस्कुरा रा-रहा हूँ
शाहबाज़ मेहतिर
नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ये किस तरह याद आ रही हो ये ख़्वाब कैसा दिखा रही हो
कि जैसे सच-मुच निगाह के सामने खड़ी मुस्कुरा रही हो
कैफ़ी आज़मी
नज़्म
मैं ख़ुद मैं हसन कूज़ा-गर पा-ब-गिल ख़ाक-बर-सर बरहना
सर-ए-चाक ज़ोलीदा-मू सर-ब-ज़ानू
नून मीम राशिद
नज़्म
तुम पलट आओ गुज़र जाओ या मुड़ कर देखो
गरचे वाक़िफ़ हैं निगाहें कि ये सब धोका है